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नेताजी की सुई! 8 दिन में दूसरी मौत… अब अभिलाष नेताम की मौत ने खड़े किए सवाल

पहले डिगने यादव की मौत, अब 55 वर्षीय अभिलाष नेताम ने तोड़ा दम; अमलीपदर में निजी उपचार और इंजेक्शन को लेकर परिजनों ने उठाए सवाल

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के अमलीपदर क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। महज आठ दिनों के भीतर इलाज के बाद दो मरीजों की मौत के मामले सामने आने से क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। पहला मामला सराईपानी निवासी डिगने यादव का था। अब सरना बहाल, कुर्लापारा निवासी 55 वर्षीय अभिलाष नेताम की मौत ने निजी उपचार, दवाओं और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

निजी चिकित्सक से कराया गया था उपचार

परिजनों के मुताबिक, अभिलाष नेताम का उपचार अमलीपदर के निजी चिकित्सक डॉ. मनीष सिन्हा ने किया था। उपचार के दौरान उन्हें तीन एंटी-मलेरियल इंजेक्शन लगाए जाने की बात सामने आई है।

परिजनों का कहना है कि 14 तारीख की रात करीब 8:40 बजे इंजेक्शन का डोज पूरा होने के बाद अभिलाष की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी, जिसके बाद परिजन उन्हें तत्काल उरमाल स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।

उरमाल से धर्मगढ़ और फिर देवभोग तक रेफर

उरमाल स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन अभिलाष को उरमाल से धर्मगढ़ और फिर धर्मगढ़ से देवभोग लेकर पहुंचे।

परिजनों के अनुसार, देवभोग पहुंचने के बाद अभिलाष की हालत में कुछ सुधार दिखाई दिया। इसके बाद वे उन्हें वापस घर ले आए। हालांकि बुधवार दोपहर करीब 1 बजे सरना बहाल स्थित घर पर उनकी मौत हो गई।

एक मरीज की बिगड़ती हालत के बाद लगातार अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों तक रेफरल की यह प्रक्रिया अब क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर रही है।

रेफरल पर्ची में तीन एंटी-मलेरियल इंजेक्शन का उल्लेख

मामले में मरीज की रेफरल पर्ची को अहम दस्तावेज माना जा रहा है। परिजनों के अनुसार, पर्ची में केस हिस्ट्री के दौरान तीन एंटी-मलेरियल इंजेक्शन दिए जाने का उल्लेख है। उपचार करने वाले चिकित्सक का नाम भी इसमें दर्ज होने की बात कही जा रही है।

हालांकि, केवल इंजेक्शन लगाए जाने और उसके बाद मरीज की तबीयत बिगड़ने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मौत इंजेक्शन के कारण ही हुई। इसके लिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, बीमारी की स्थिति, जांच रिपोर्ट, दवा का नाम और मात्रा, इंजेक्शन दिए जाने का समय, उपचार पद्धति तथा पोस्टमार्टम या विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच जैसे तथ्यों की जरूरत होगी।

जांच के बाद ही सामने आएगी असली वजह

इस मामले में कई अहम सवाल जांच का विषय हैं—

अभिलाष को कौन-सा एंटी-मलेरियल इंजेक्शन दिया गया था?

इंजेक्शन देने का चिकित्सकीय आधार क्या था?

दवा की निर्धारित डोज और उपचार प्रोटोकॉल क्या था?

इंजेक्शन के बाद सांस लेने में परेशानी क्यों हुई?

मरीज की पहले से कोई गंभीर बीमारी या अन्य चिकित्सकीय स्थिति थी या नहीं?

उपचार के दौरान मरीज की निगरानी किस तरह की गई?

रेफरल पर्ची और उपचार रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी एक-दूसरे से मेल खाती है या नहीं?

संबंधित निजी क्लीनिक का पंजीयन और चिकित्सक की वैधता क्या है?

इन सवालों का जवाब आरोपों या अटकलों से नहीं, बल्कि मेडिकल रिकॉर्ड और स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही सामने आ सकता है।

आठ दिन में दो मौतें, क्या होगी संयुक्त जांच?

अभिलाष नेताम की मौत ऐसे समय हुई है, जब अमलीपदर क्षेत्र में डिगने यादव की मौत का मामला भी चर्चा में है। डिगने यादव की निजी क्लीनिक में उपचार के बाद तबीयत बिगड़ने और मौत के मामले में परिजनों ने आर्टीसुनेट इंजेक्शन और उपचार प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले की जांच की बात कही गई थी, जबकि संबंधित चिकित्सक ने आरोपों को निराधार बताया था।

अब आठ दिनों के भीतर सामने आए दूसरे मामले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या स्वास्थ्य विभाग दोनों घटनाओं की अलग-अलग जांच के साथ इनके बीच किसी समानता की भी समीक्षा करेगा।

फिलहाल अभिलाष नेताम की मौत की वास्तविक वजह मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में किसी दवा या उपचार को सीधे मौत का कारण मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए निजी चिकित्सा संस्थानों के पंजीयन, उपचार प्रोटोकॉल और मरीजों की निगरानी की जांच की मांग जरूर तेज हो सकती है।

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