स्मार्ट मीटर का झटका! 500 का बिल पहुंचा ₹2500
स्मार्ट मीटर का झटका! 500 का बिल पहुंचा ₹2500
राज्य में स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। बिजली विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार बिजली बिलों से जुड़ी 50 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं, लेकिन इनमें से 10 फीसदी शिकायतों का भी संतोषजनक समाधान नहीं हो पाया है। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उनके बिजली बिलों में अचानक कई गुना बढ़ोतरी हुई है। जिन घरों में पहले हर महीने लगभग ₹500 से ₹700 तक का बिल आता था, वहां अब ₹2000 से ₹2500 तक के बिल पहुंच रहे हैं। बढ़े हुए बिलों ने मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है।
शिकायतें बढ़ीं, समाधान नहीं
बिजली उपभोक्ताओं का कहना है कि बढ़े हुए बिलों की शिकायत लेकर वे बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। कई शिकायतें महीनों से लंबित पड़ी हैं। विभागीय स्तर पर शिकायतों की जांच की बात कही जा रही है, लेकिन समाधान की रफ्तार बेहद धीमी बताई जा रही है।
स्मार्ट मीटर पर उठ रहे सवाल
स्मार्ट मीटर को बिजली खपत की सटीक जानकारी और पारदर्शिता के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब यही व्यवस्था विवादों के घेरे में आ गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर लगने के बाद खपत के आंकड़े अचानक बढ़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे बिलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है।
विपक्ष और उपभोक्ता संगठन भी सक्रिय
बढ़ते बिजली बिलों के मुद्दे को लेकर उपभोक्ता संगठन और विपक्षी दल भी सरकार तथा बिजली विभाग पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि स्मार्ट मीटर तकनीक में कोई खामी नहीं है तो फिर हजारों उपभोक्ता एक जैसी शिकायतें क्यों कर रहे हैं। उन्होंने सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच और प्रभावित उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की है।
विभाग का पक्ष
बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं और अधिकांश मामलों में बिल वास्तविक खपत के आधार पर तैयार किए जा रहे हैं। विभाग ने उपभोक्ताओं से किसी भी प्रकार की समस्या होने पर शिकायत दर्ज कराने और जांच प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की है।
बढ़ती चिंता का विषय
बिजली बिलों को लेकर सामने आ रही हजारों शिकायतों ने स्मार्ट मीटर परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर टिकी है कि विभाग लंबित शिकायतों का समाधान कितनी तेजी से करता है और बढ़े हुए बिलों की समस्या से लोगों को कब राहत मिलती है।
