अंबेडकर अस्पताल में पानी का संकट, वार्ड-बाथरूम सूखे; मरीज-परिजन पानी के लिए भट
रायपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान Dr. Bhimrao Ambedkar Memorial Hospital में शुक्रवार को जल संकट ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। लगातार बारिश के बीच अस्पताल परिसर के भीतर मरीज और उनके परिजन पानी के लिए भटकते नजर आए। वार्डों के बाथरूम सूखे पड़े रहे, पीने के पानी के कूलर बंद मिले और कई लोगों को बाल्टी, बोतल व डिब्बों के सहारे अस्पताल के अन्य हिस्सों से पानी जुटाना पड़ा।
अस्पताल में प्रतिदिन पांच हजार से अधिक मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। ऐसे में पानी की आपूर्ति बाधित होने से उपचार और स्वच्छता व्यवस्था दोनों प्रभावित हुईं।
चार-पांच दिनों से बनी हुई थी समस्या
जानकारी के मुताबिक अस्पताल में पिछले कई दिनों से जलापूर्ति प्रभावित थी। मरीजों और परिजनों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। शुक्रवार को स्थिति और गंभीर हो गई, जिसके चलते अस्पताल के कई वार्डों में पानी की किल्लत बढ़ गई।
सुबह से ही पानी नहीं मिलने के कारण कई परिजन भर्ती मरीजों को छोड़कर पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हुई जो स्वयं चलने-फिरने में असमर्थ हैं। बाथरूमों में पानी नहीं होने से स्वच्छता पर भी असर पड़ा और संक्रमण का खतरा बढ़ गया।
बाल्टी और बोतल लेकर पानी ढूंढते रहे लोग
अस्पताल परिसर में कई परिजन खाली बोतलें और बाल्टियां लेकर पानी की तलाश करते दिखाई दिए। कुछ लोगों को मरीजों की जरूरतों के लिए बाजार से पैक्ड पानी खरीदकर लाना पड़ा। वार्डों और शौचालयों के आसपास बदबू की शिकायतें भी सामने आईं।
परिजनों का कहना है कि पानी की कमी के कारण हाथ धोने, शौचालय उपयोग और मरीजों की सामान्य देखभाल तक प्रभावित हो रही थी। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसी स्थिति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी।
मोटर खराब होने से ठप हुई व्यवस्था
जांच में सामने आया कि अस्पताल की ऊपरी टंकियों तक पानी पहुंचाने के लिए दो मोटर लगी हैं। नगर निगम का पानी पहले भूमिगत टंकियों में जमा किया जाता है, जिसके बाद मोटरों के जरिए उसे अस्पताल की विभिन्न टंकियों तक पहुंचाया जाता है।
पिछले चार दिनों से दोनों मोटरों में तकनीकी खराबी बनी हुई थी। एक मोटर की मरम्मत की गई, लेकिन वह फिर खराब हो गई। इसके चलते पूरे अस्पताल की जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो गई।
बोरवेल भी नहीं दे रहे पर्याप्त पानी
अस्पताल परिसर में छह बोरवेल मौजूद हैं, लेकिन कई बोरवेलों में पानी का स्तर काफी कम हो चुका है, जबकि कुछ पूरी तरह सूख चुके हैं। ऐसे में अस्पताल की निर्भरता मुख्य रूप से नगर निगम की जलापूर्ति पर है। मोटर खराब होने के कारण निगम से मिलने वाला पानी भी वार्डों तक नहीं पहुंच सका।
मरीजों ने जताई नाराजगी
मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि पीने के पानी और दैनिक जरूरतों के लिए उन्हें घंटों परेशान होना पड़ा। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक दिक्कत हुई। कई लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इतनी बड़ी स्वास्थ्य संस्था में बैकअप व्यवस्था का अभाव गंभीर चिंता का विषय है।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
अस्पताल अधीक्षक Dr. Santosh Sonkar ने बताया कि पानी सप्लाई करने वाली मोटर में तकनीकी खराबी आ गई थी। एक मोटर को सुधार लिया गया है, जबकि दूसरी की मरम्मत का काम भी तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मरीजों के लिए वैकल्पिक रूप से पानी की व्यवस्था की गई थी और जल्द ही आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कर दी जाएगी।
