अमलीपदर में पुलिस चेकिंग पर बड़ा विवाद: “रसूखदारों को छोड़ा, आम जनता पर कार्रवाई”, रिश्वत मांगने का भी आरोप
थाने के सामने चल रहे वाहन चेकिंग अभियान पर उठे गंभीर सवाल, स्थानीय लोगों में नाराजगी
गरियाबंद | आशुतोष सिंह
गरियाबंद जिले के अमलीपदर थाना क्षेत्र में पुलिस की वाहन चेकिंग कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। थाने के सामने चलाए गए चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने और आम लोगों के साथ सख्ती करने के आरोप लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि जहां आम वाहन चालकों के चालान काटे गए, वहीं रसूखदार और पहचान वाले लोगों को बिना जांच के ही छोड़ दिया गया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुलिस द्वारा ड्रिंक एंड ड्राइव और यातायात नियमों के पालन के नाम पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई और चालानी कार्रवाई भी हुई। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ वाहन चालकों को केवल “पहचान” और “संपर्क” के आधार पर जाने दिया गया, जबकि आम नागरिकों पर सख्ती दिखाई गई।
“500 दे दो… नहीं तो 1200 का ऑनलाइन चालान”
मामला तब और गंभीर हो गया जब मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिसकर्मी एक व्यक्ति से यह कहते सुना गया—
“500 रुपये दे दो, नहीं तो ऑनलाइन चालान करूँगा तो 1200 रुपये लगेंगे।”
इस कथित बयान के सामने आने के बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
निष्पक्षता पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि पुलिस चेकिंग अभियान चला रही है, तो कार्रवाई भी बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए।
लोगों ने आरोप लगाया कि एक तरफ आम जनता से सख्ती की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावशाली लोगों को राहत दी जा रही है। इससे पुलिस की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह कानून व्यवस्था और जनता के भरोसे दोनों के लिए गंभीर मामला है।
