रेत के ‘लाल सोने’ पर खूनी जंग
छत्तीसगढ़ में रेत के ‘लाल सोने’ पर कब्जे की लड़ाई… कहीं जिंदा जलाया, कहीं अफसरों को दौड़ाकर पीटा, कब थमेगा यह खूनी खेल?
छत्तीसगढ़ में रेत अब सिर्फ निर्माण कार्यों का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह ऐसा ‘लाल सोना’ बन चुकी है जिसके लिए खूनी संघर्ष तक हो रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिन्होंने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध रेत खनन और उसके कारोबार पर कब्जे की जंग में अब न सिर्फ आम लोग बल्कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी निशाने पर आ रहे हैं।
बीते कुछ वर्षों में रेत के अवैध कारोबार ने एक संगठित नेटवर्क का रूप ले लिया है। करोड़ों रुपये के इस धंधे में शामिल गिरोहों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि कार्रवाई करने पहुंची टीमों पर हमला करना भी उनके लिए आम बात बन गई है। कई मामलों में अधिकारियों को दौड़ाकर पीटा गया, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई और कार्रवाई रोकने के लिए खुलेआम धमकियां दी गईं।
स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ क्षेत्रों में रेत के विवाद ने जानलेवा रूप ले लिया। कहीं लोगों को जिंदा जलाने जैसी सनसनीखेज घटनाएं सामने आईं तो कहीं वर्चस्व की लड़ाई में हिंसा और हत्या के मामले दर्ज हुए। इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों और रेत की बढ़ती मांग ने इस अवैध कारोबार को और अधिक लाभदायक बना दिया है। यही वजह है कि रेत घाटों पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। कई बार प्रशासन द्वारा चलाए गए अभियान भी लंबे समय तक असरदार साबित नहीं हो पाते, क्योंकि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद ही अवैध खनन फिर शुरू हो जाता है।
हालांकि सरकार और प्रशासन समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करते रहे हैं। रेत से भरे ट्रैक्टर और हाइवा जब्त किए जाते हैं, जुर्माना लगाया जाता है और एफआईआर भी दर्ज होती है। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बताते हैं कि यह समस्या अब सिर्फ अवैध खनन तक सीमित नहीं रही, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुकी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर छत्तीसगढ़ में रेत के इस ‘लाल सोने’ पर कब्जे की खूनी लड़ाई कब थमेगी? जब तक अवैध खनन के नेटवर्क पर प्रभावी और लगातार कार्रवाई नहीं होगी, तब तक रेत का यह कारोबार हिंसा, दहशत और संघर्ष की नई कहानियां लिखता रहेगा।
