अब जंगलों की रखवाली करेंगे DRG जवान, तस्करों-शिकारियों की खैर नहीं
माओवादियों के बाद अब जंगलों की सुरक्षा में DRG, तस्करों और शिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ में माओवादियों के खिलाफ लगातार मिली सफलता के बाद अब सरकार जंगलों की सुरक्षा को लेकर नई रणनीति पर काम कर रही है। राज्य के घने वन क्षेत्रों में अब डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवान तैनात किए जाएंगे, ताकि वन तस्करों, अवैध शिकार करने वालों और जंगलों में सक्रिय अन्य अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
सरकार का मानना है कि जिन DRG जवानों ने वर्षों तक नक्सल प्रभावित इलाकों में कठिन परिस्थितियों में काम किया है, वे जंगलों की भौगोलिक परिस्थितियों और संवेदनशील इलाकों से भली-भांति परिचित हैं। यही अनुभव अब वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा में उपयोग किया जाएगा।
वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। इन अभियानों का उद्देश्य जंगलों में लकड़ी की तस्करी, वन्यजीवों के अवैध शिकार और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
सूत्रों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में पहले माओवादी गतिविधियां अधिक थीं, वहां अब सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देते हुए जंगलों की निगरानी मजबूत की जाएगी। इससे न केवल वन संपदा का संरक्षण होगा बल्कि दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा बलों और वन विभाग के बीच यह तालमेल भविष्य में वन अपराधों पर लगाम लगाने में अहम भूमिका निभा सकता है। इससे जंगलों में कानून का प्रभाव बढ़ेगा और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
क्या होगा फायदा?
- जंगलों में वन तस्करी पर सख्त निगरानी।
- अवैध शिकार करने वाले गिरोहों पर तेज कार्रवाई।
- संवेदनशील वन क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ेगी।
- वन विभाग और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय।
- वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को मिलेगा बल।
