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गरियाबंद में डीजल संकट के बीच अधिक वसूली के आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

गरियाबंद-आशुतोष सिंह-ऐश्वर्य उपाध्याय (रायपुर)

प्रदेश में इन दिनों पेट्रोल और डीजल की कमी से आम जनता परेशान है। कई जिलों में लोग घंटों लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, तो कहीं सीमित मात्रा में ईंधन दिया जा रहा है। लेकिन इस संकट के बीच गरियाबंद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और पेट्रोल पंप संचालकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम धुरवागुड़ी के सिहायलटी स्थित जय जवान पेट्रोल पंप का बताया जा रहा है, जहां किसानों और आम लोगों से डीजल के नाम पर निर्धारित दर से अधिक रकम वसूले जाने का आरोप लगा है। इस पूरे मामले का एक वीडियो भी सामने आया है, जो अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

20 लीटर डीजल के नाम पर ₹2100 की वसूली !

वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों के मुताबिक पेट्रोल पंप में डीजल लेने पहुंचे लोगों को पहले 20 लीटर डीजल की पर्ची दी जा रही है और उसके एवज में ₹2100 वसूले जा रहे हैं। जबकि पेट्रोल पंप के नोजल स्क्रीन पर डीजल का रेट ₹100.20 प्रति लीटर साफ दिखाई दे रहा है। इस हिसाब से 20 लीटर डीजल की कीमत लगभग ₹2004 होती है, लेकिन लोगों से अतिरिक्त पैसे लिए जाने का आरोप अब बड़ा मुद्दा बन गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि संकट की स्थिति में लोग मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर डीजल लेने को विवश हैं। कई किसानों ने आरोप लगाया कि अगर अतिरिक्त राशि नहीं दी जाए तो उन्हें समय पर डीजल नहीं मिल पाता।

किसानों की बढ़ी चिंता, खेती-किसानी पर असर

वर्तमान समय खेती-किसानी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खेतों की जुताई, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए डीजल की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। लेकिन डीजल की कमी और ऊपर से कथित अवैध वसूली ने किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले ही महंगाई और मौसम की मार से किसान परेशान हैं, ऐसे में डीजल के नाम पर अतिरिक्त पैसे वसूले जाना किसानों की कमर तोड़ने जैसा है। कई किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “अगर इसी तरह संकट के समय लोगों की मजबूरी का फायदा उठाया जाएगा, तो गरीब और किसान आखिर जाएं तो जाएं कहां?”

प्रशासन पर भी उठ रहे सवाल

गौरतलब है कि जिले में पेट्रोल और डीजल वितरण को लेकर प्रशासन द्वारा समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं, ताकि किसी प्रकार की कालाबाजारी या जमाखोरी न हो। इसके बावजूद अगर खुलेआम निर्धारित कीमत से ज्यादा राशि वसूली जा रही है, तो यह प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है।

अब लोगों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित पेट्रोल पंप संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही जिले के अन्य पेट्रोल पंपों की भी जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं और भी इसी प्रकार की अवैध वसूली तो नहीं की जा रही।

बड़ा सवाल…

क्या डीजल संकट की आड़ में आम जनता और किसानों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है?
क्या प्रशासन इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेगा या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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