‘मिशन वात्सल्य’ योजना के नाम पर बड़ा खेल: फर्जी नियुक्ति पत्र बांटकर बेरोजगारों से ठगे लाखों, रैकेट का पर्दाफाश
राइम डेस्क, [अपने शहर/पोर्टल का नाम दर्ज करें]:
देश में सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाने वाले एक बेहद शातिर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मिशन वात्सल्य’ (Mission Vatsalya) योजना के तहत चल रहे एक फर्जी भर्ती रैकेट का पर्दाफाश किया गया है। यह गिरोह युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूल रहा था और बदले में हुबहू असली दिखने वाले फर्जी नियुक्ति पत्र (Counterfeit Appointment Letters) थमा देता था।
ऐसे हुआ महाधोखाधड़ी का खुलासा
मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब कुछ पीड़ित युवा अपने हाथ में नियुक्ति पत्र लेकर संबंधित सरकारी दफ्तर में जॉइनिंग के लिए पहुंचे। अधिकारियों ने जब उन पत्रों की जांच की, तो उनके होश उड़ गए। रिकॉर्ड में ऐसी किसी भी भर्ती का कोई जिक्र नहीं था और न ही विभाग द्वारा कोई आधिकारिक सूची जारी की गई थी।
दस्तावेजों पर विभाग के फर्जी सील-सिक्के और अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर किए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर इस रैकेट के मुख्य गुर्गों को धर दबोचा।
सरकारी योजना की आड़ में चल रहा था रैकेट
या है मिशन वात्सल्य?
केंद्र सरकार की ‘मिशन वात्सल्य’ योजना मुख्य रूप से बच्चों की सुरक्षा, कल्याण और पुनर्वास के लिए चलाई जाती है। ठगों ने इसी संवेदनशील योजना को अपना हथियार बनाया ताकि लोगों को आसानी से झांसे में लिया जा सके।
गिरोह के सदस्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के उन बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते थे जो सोशल मीडिया या स्थानीय संपर्कों के जरिए नौकरी की तलाश में रहते थे। ठग खुद को महिला एवं बाल विकास विभाग का बड़ा अधिकारी बताते थे और दावा करते थे कि ‘मिशन वात्सल्य’ के तहत विभिन्न पदों पर सीधी भर्तियां (Direct Recruitment) की जा रही हैं।
लाखों की वसूली और फर्जी ‘जॉइनिंग लेटर’
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि यह रैकेट बेहद पेशेवर तरीके से काम कर रहा था।
प्रोसेसिंग फीस के नाम पर वसूली: पहले फॉर्म भरने और फिर ‘सिक्योरिटी मनी’ व ‘मेडिकल टेस्ट’ के नाम पर प्रति उम्मीदवार 50,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।
कस्टमर केयर का ड्रामा: युवाओं को शक न हो, इसके लिए बकायदा फर्जी ईमेल आईडी और व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे, जहां से उन्हें फर्जी अपडेट दिए जाते थे।
हूबहू असली दिखने वाले दस्तावेज: अंत में, पीड़ितों को जो जॉइनिंग लेटर दिया जाता था, उसका फॉर्मेट, लोगो और भाषा बिल्कुल सरकारी पत्रों जैसी होती थी, जिससे कोई भी साधारण युवा धोखा खा जाए।
प्रशासन की अपील: झांसे में न आएं
इस घटना के बाद संबंधित विभाग और जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि ‘मिशन वात्सल्य’ या किसी भी सरकारी योजना के तहत नौकरियों के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और समाचार पत्रों में ही विज्ञापन जारी किए जाते हैं। किसी भी बिचौलिए या अनधिकृत व्यक्ति को नौकरी के नाम पर नकद या ऑनलाइन भुगतान न करें। यदि कोई ऐसी पेशकश करता है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में इसकी सूचना दें।
