ब्लैकलिस्ट कंपनी पर मेहरबानी!
ब्लैकलिस्ट कंपनी पर मेहरबानी! अमानक दवा सप्लाई के बावजूद करोड़ों की खरीदी पर उठे सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी दवा खरीदी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश में ब्लैकलिस्टेड घोषित की जा चुकी एक कंपनी से राज्य में करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीदी की गई। हैरानी की बात यह है कि कंपनी पर अमानक और गुणवत्ता मानकों पर खरी न उतरने वाली दवाओं की सप्लाई के आरोप लगने के बाद भी उसका अनुबंध समाप्त नहीं किया गया।
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
अमानक दवाओं की सप्लाई पर विवाद
सूत्रों के अनुसार, संबंधित कंपनी द्वारा सप्लाई की गई कुछ दवाओं की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आई थीं। जांच के दौरान कुछ दवाओं के मानक अनुरूप नहीं पाए जाने की बात भी कही जा रही है। इसके बावजूद कंपनी को सरकारी खरीद प्रक्रिया में शामिल रखा गया और बड़े पैमाने पर ऑर्डर जारी किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग होने वाली दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ऐसे में यदि किसी कंपनी का रिकॉर्ड पहले से विवादित रहा हो तो उसकी विस्तृत समीक्षा आवश्यक होती है।
करोड़ों की खरीदी पर उठ रहे सवाल
जानकारी के मुताबिक, संबंधित कंपनी को करोड़ों रुपये के ऑर्डर दिए गए। अब यह सवाल उठ रहा है कि जब कंपनी दूसरे राज्य में ब्लैकलिस्टेड थी तो छत्तीसगढ़ में उसे सरकारी टेंडर और सप्लाई का अवसर कैसे मिला।
विपक्ष का आरोप है कि यदि ब्लैकलिस्टिंग और गुणवत्ता संबंधी जानकारी विभाग के पास उपलब्ध थी, तो फिर कंपनी को लाभ पहुंचाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पूरे मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कह रहे हैं।
जांच की मांग तेज
मामले के सार्वजनिक होने के बाद विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई है तो दोषियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाली दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी है ताकि आम जनता का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था पर कायम रहे।
निष्कर्ष
ब्लैकलिस्टेड कंपनी से दवा खरीदी और अमानक दवा सप्लाई के आरोपों के बीच छत्तीसगढ़ की सरकारी खरीद व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अब सभी की नजर संभावित जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन सकता है।
