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आबकारी विभाग और पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल, खुलेआम शराबखोरी से किसान और ग्रामीण परेशान

सरकारी सिस्टम फेल! गरियाबंद में खेत, सड़क और देवस्थल बने शराबखोरी के अड्डे

आबकारी विभाग और पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल, खुलेआम शराबखोरी से किसान और ग्रामीण परेशान

गरियाबंद | आशुतोष सिंह ,ऐश्वर्य उपाध्याय

गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अमलीपदर में प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। क्षेत्र में खुलेआम शराब सेवन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे हो चुके हैं कि खेत, सड़क किनारे सार्वजनिक स्थल और यहां तक कि देवस्थल भी शराबियों के अड्डे बनते जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में संचालित सरकारी शराब दुकानों में बैठकर शराब पीने के लिए आहाता की व्यवस्था मौजूद है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग शराब खरीदकर खुले स्थानों पर सेवन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

किसानों की बढ़ी मुश्किलें

सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को झेलनी पड़ रही है। शराब के नशे में लोग खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और कांच की बोतलें तोड़ रहे हैं। खेतों में फैले टूटे कांच से किसानों और मजदूरों के घायल होने का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार खेतों में काम करने वाले लोग कांच की वजह से चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

देवस्थलों तक पहुंची शराबखोरी

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि धार्मिक स्थलों तक में शराबियों का जमावड़ा देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, देवस्थलों पर शराब पीने और कांच फोड़ने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है।

आबकारी विभाग पर गंभीर सवाल

पूरे मामले में आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि विभाग न तो खुले में शराब सेवन पर रोक लगा पा रहा है और न ही नियमों का पालन सुनिश्चित कर पा रहा है। क्षेत्र में निगरानी और कार्रवाई का लगभग अभाव दिखाई दे रहा है।

“ड्रिंक एंड ड्राइव” तक सीमित पुलिस कार्रवाई

वहीं पुलिस प्रशासन की कार्रवाई केवल ड्रिंक एंड ड्राइव जांच तक सीमित नजर आ रही है। सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और उत्पात मचाने वालों के खिलाफ कोई प्रभावी अभियान नहीं चलाया जा रहा, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

जवाबदेही पर बड़ा सवाल

इस पूरी लापरवाही का असर सिर्फ किसानों पर नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आम जनता पर पड़ रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इस गंभीर समस्या के लिए जिम्मेदार कौन है और प्रशासन कब तक सिर्फ मूकदर्शक बना रहेगा?

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