पहले दिन ही बैठा VSK ऐप, शिक्षकों का फूटा गुस्सा
ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था शुरू होते ही तकनीकी खामियां सामने आईं, निजी मोबाइल और लोकेशन ट्रैकिंग को लेकर भी उठे सवाल
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए लागू की गई ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था पहले ही दिन सवालों के घेरे में आ गई। प्रदेशभर के कई स्कूलों में शिक्षकों को VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज करनी थी, लेकिन सर्वर और तकनीकी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक अपनी हाजिरी नहीं लगा सके। इसके साथ ही शिक्षकों के विभिन्न संगठनों ने इस व्यवस्था का विरोध शुरू कर दिया है।
शिक्षा विभाग ने 16 जून से ऑनलाइन उपस्थिति और ऑनलाइन अवकाश प्रणाली को अनिवार्य किया है। नए नियमों के तहत स्कूलों में शिक्षकों को VSK ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करनी है, जबकि कार्यालयों में बायोमेट्रिक प्रणाली लागू की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया था कि निर्धारित प्लेटफॉर्म पर उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर वेतन प्रभावित हो सकता है।
लेकिन व्यवस्था लागू होने के पहले ही दिन कई शिक्षकों को लॉगिन, चेक-इन और सर्वर संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर ऐप ठीक से काम नहीं कर पाया, जिससे शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई। शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी खामियों का खामियाजा कर्मचारियों पर नहीं थोपा जाना चाहिए।
निजी मोबाइल और निजता का मुद्दा भी गरमाया
विरोध कर रहे शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार शिक्षकों से उनके निजी मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग सरकारी काम के लिए करवा रही है, जबकि इसके लिए कोई अलग सुविधा या भत्ता उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके अलावा ऐप द्वारा लोकेशन आधारित उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था को लेकर भी कई शिक्षकों ने निजता के अधिकार का मुद्दा उठाया है।
विभाग का दावा, पारदर्शिता बढ़ेगी
शिक्षा विभाग का कहना है कि ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था से स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ेगी, अनुपस्थिति पर नियंत्रण होगा और शिक्षा व्यवस्था की निगरानी आसान बनेगी। विभाग का मानना है कि डिजिटल सिस्टम से वास्तविक समय में उपस्थिति की जानकारी उपलब्ध होगी और कार्यसंस्कृति में सुधार आएगा।
आगे क्या?
फिलहाल VSK ऐप की तकनीकी खामियों और शिक्षकों के विरोध ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। शिक्षक संगठन मांग कर रहे हैं कि जब तक सिस्टम पूरी तरह सुचारु नहीं हो जाता, तब तक ऑनलाइन हाजिरी को अनिवार्य न बनाया जाए। वहीं विभाग इस व्यवस्था को लागू करने के अपने फैसले पर कायम नजर आ रहा है।
निष्कर्ष
डिजिटल शिक्षा प्रशासन की दिशा में उठाया गया यह कदम शुरुआत में ही विवादों में घिर गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार तकनीकी खामियों को कितनी जल्दी दूर करती है और शिक्षकों की आपत्तियों का समाधान किस तरह निकालती है। फिलहाल VSK ऐप और ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन चुकी है।
