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अतिक्रमण और गंदगी से जूझ रहा गजराज बांध तालाब

रायपुर। राजधानी का गजराज बांध तालाब अतिक्रमण और गंदगी की मार झेलते हुए अपनी पहचान खोता जा रहा है। करीब 230 एकड़ क्षेत्र में फैले इस महत्वपूर्ण जलाशय को संवारने और संरक्षित करने की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों में बंटी होने के कारण विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित हो रही है। जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की कमी तालाब संरक्षण की राह में बड़ी चुनौती बन गई है।

जानकारी के अनुसार, गजराज बांध तालाब सिंचाई विभाग के अधीन आता है, जबकि इसका कुछ हिस्सा रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के दायरे में शामिल है। हाल ही में राज्यपाल के निर्देश के बाद नगर निगम को इस तालाब को पेयजल भंडार के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नगर निगम के अपर आयुक्त विनोद पाण्डेय ने बताया कि गजराज बांध के समग्र विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके तहत तालाब की वर्तमान जलभराव क्षमता, कैचमेंट एरिया और जल संरक्षण की संभावनाओं का तकनीकी अध्ययन कराया जाएगा।

योजना के तहत भविष्य में यहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही आसपास स्थित अन्य तालाबों को इंटरलिंक कर जल प्रवाह और जलभराव बनाए रखने की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। इससे वर्षभर तालाब में पर्याप्त पानी बनाए रखने में मदद मिल सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि तालाबों का संरक्षण केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अतिक्रमण हटाने, कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण के ठोस उपायों पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। गजराज बांध तालाब की स्थिति भी इसी व्यापक दृष्टिकोण की मांग कर रही है।

फिलहाल नगर निगम, सिंचाई विभाग और आरडीए के संयुक्त समन्वय से विकास कार्यों की शुरुआत करने की बात कही जा रही है। अब यह देखना होगा कि वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहे इस जलाशय को बचाने और पुनर्जीवित करने की योजना जमीन पर कितनी तेजी से उतर पाती है।

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