संदेहास्पद मौत पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल: बहन ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार, एफआईआर नहीं लेने का आरोप
संदिग्ध मौत पर बवाल: बहन ने SP से मांगा इंसाफ
गरियाबंद।आशुतोष सिंह राजपूत । ऐश्वर्य उपाध्याय

मैनपुर थाना क्षेत्र में युवक आकाश कश्यप की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। मृतक की बहन आकांक्षा कश्यप ने पुलिस अधीक्षक (SP) गरियाबंद को लिखित आवेदन सौंपकर आरोप लगाया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना देने के बावजूद मैनपुर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। अब उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, तत्काल अपराध पंजीबद्ध करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
29 जून की रात हुआ था हमला, इलाज के दौरान गई जान
आवेदन के अनुसार, 29 जून 2026 की रात आकाश कश्यप पर कथित रूप से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद उनका इलाज गरियाबंद जिला अस्पताल में चल रहा था, लेकिन 1 जुलाई 2026 को उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि यह सामान्य घटना नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।
‘FIR दर्ज नहीं होगी’ कहकर लौटाने का आरोप
मृतक के परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद वे मैनपुर थाना पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की, लेकिन पुलिस ने कथित तौर पर यह कहते हुए आवेदन लेने और अपराध दर्ज करने से इनकार कर दिया कि “अभी एफआईआर दर्ज नहीं होगी।” इस रवैये से परिवार में भारी नाराजगी है।
BNSS की धाराओं का दिया हवाला
आकांक्षा कश्यप ने अपने आवेदन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(1) और धारा 173(4) का उल्लेख करते हुए कहा है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस का कानूनी दायित्व है। यदि थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है, तो पीड़ित को पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर अपराध दर्ज कराने का अधिकार प्राप्त है।
SC समुदाय की सुरक्षा का भी उठाया मुद्दा
परिजनों का कहना है कि आकाश कश्यप अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से थे। ऐसे में यह मामला केवल एक संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की है कि जांच के दौरान इस पहलू को भी गंभीरता से देखा जाए और यदि किसी विशेष कानून के तहत कार्रवाई बनती है तो उसे भी लागू किया जाए।
SP से कीं ये प्रमुख मांगें
परिवार ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में मांग की है कि—
- मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
- किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
- सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए।
- दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
- थाना मैनपुर की भूमिका की विभागीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
अब SP के फैसले पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद मैनपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजर पुलिस अधीक्षक गरियाबंद की आगामी कार्रवाई पर है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला पुलिस की जवाबदेही और कानून के पालन को लेकर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
