6 साल पुराने लिफ्ट-एस्केलेटर के सहारे बनेगा रायपुर स्काईवॉक
राजधानी के जीई रोड पर वर्षों से अधूरा पड़ा बहुचर्चित स्काईवॉक प्रोजेक्ट एक बार फिर सुर्खियों में है। परियोजना को पूरा करने के लिए अब छह साल पुराने लिफ्ट, एस्केलेटर और अन्य संरचनात्मक उपकरणों का उपयोग करने की तैयारी की जा रही है। इन उपकरणों को स्थापित करने के लिए जारी किए गए दो टेंडर फेल हो चुके हैं, जिसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) तीसरी बार एजेंसी तलाशने की तैयारी में जुट गया है।
जानकारी के अनुसार, शास्त्री चौक और जीई रोड पर पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए वर्ष 2016-17 में स्काईवॉक परियोजना शुरू की गई थी। शुरुआत में इसकी लागत 42.55 करोड़ रुपए थी, जो बाद में बढ़कर लगभग 77 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। निर्माण कार्य करीब 50 प्रतिशत पूरा होने के बाद वर्ष 2018 में रोक दिया गया था।
अब परियोजना को फिर से शुरू करते हुए विभाग पहले से खरीदे गए लिफ्ट और एस्केलेटर लगाने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि ये उपकरण पिछले छह वर्षों से उपयोग में नहीं आए हैं और लंबे समय तक स्टोरेज में पड़े रहे हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलेक्ट्रो-मैकेनिकल उपकरणों को सार्वजनिक उपयोग में लाने से पहले उनकी विस्तृत जांच और सुरक्षा प्रमाणन आवश्यक है।
दो बार टेंडर फेल
पीडब्ल्यूडी ने लिफ्ट और एस्केलेटर के इंस्टॉलेशन के लिए 92 लाख रुपए की लागत से दो बार टेंडर जारी किया, लेकिन किसी भी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। अधिकारियों का मानना है कि निर्धारित राशि कम होने के कारण कंपनियां भागीदारी से बच रही हैं। अब विभाग तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
बदला गया डिजाइन
सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक योजना में 12 स्थानों पर एस्केलेटर लगाने का प्रस्ताव था, जिसे घटाकर अब 8 स्थानों तक सीमित कर दिया गया है। वहीं, अंबेडकर अस्पताल और डीकेएस अस्पताल के पास लिफ्ट लगाने की व्यवस्था रखी गई है।
वर्तमान में परियोजना के तहत 63 गर्डर और 25 स्लैब लगाने का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा शास्त्री चौक पर पांच मीटर चौड़ी रोटरी का निर्माण भी जारी है।
तय समय से और बढ़ सकती है देरी
स्काईवॉक परियोजना को पूरा करने के लिए 37.75 करोड़ रुपए का नया कार्यादेश जारी किया गया है। विभाग ने 12 माह में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन अधिकारियों का अनुमान है कि यह परियोजना तय समय से करीब आठ महीने अतिरिक्त ले सकती है।
पीडब्ल्यूडी (विद्युत) के कार्यपालन अभियंता एस.के. झारिया ने बताया कि पहले से खरीदे गए लिफ्ट और एस्केलेटर का ही उपयोग किया जाएगा। साथ ही इनके रखरखाव और मरम्मत के लिए अलग से वार्षिक अनुरक्षण अनुबंध (AMC) भी किया जाएगा।
राजधानी की सबसे चर्चित और विवादित परियोजनाओं में शामिल स्काईवॉक को लेकर अब सवाल यह है कि छह साल पुराने उपकरणों के सहारे यह परियोजना कितनी सुरक्षित और टिकाऊ साबित होगी।
