महासमुंद में हीरे की चमक! खनन की राह हुई साफ
महासमुंद में हीरा खनन को मिली नई रफ्तार, अन्वेषण के अगले चरण को बोर्ड की मंजूरी
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जिले के बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में 1.22 कैरेट का हीरा मिलने के बाद अब यहां हीरा खनन की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। NMDC-CMDC (NCL) के बोर्ड ने परियोजना के अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) के अगले चरण को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को राज्य के खनिज विकास के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
इस मंजूरी के बाद अब संबंधित क्षेत्र में विस्तृत भू-वैज्ञानिक सर्वे, नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण और हीरे के भंडार का विस्तृत आकलन किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी अन्वेषण में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं तो भविष्य में यहां व्यावसायिक स्तर पर हीरा खनन का रास्ता खुल सकता है।
जानकारों के अनुसार, पहले चरण के अन्वेषण के दौरान 1.22 कैरेट का हीरा मिलने से इस क्षेत्र की संभावनाओं को नई मजबूती मिली थी। इसी आधार पर बोर्ड ने अगले चरण के सर्वे और जांच कार्य को हरी झंडी दी है।
यदि भविष्य में यहां बड़े पैमाने पर हीरे का भंडार मिलता है, तो इससे न केवल राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही महासमुंद जिला देश के प्रमुख हीरा उत्पादक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकता है।
खनिज विशेषज्ञों का कहना है कि अन्वेषण का अगला चरण बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसी के आधार पर यह तय होगा कि क्षेत्र में व्यावसायिक खनन आर्थिक रूप से कितना व्यवहारिक है।
क्या है पूरा मामला?
- बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में पहले चरण के दौरान 1.22 कैरेट का हीरा मिला।
- इसके बाद NMDC-CMDC (NCL) बोर्ड ने अन्वेषण के अगले चरण को मंजूरी दी।
- अब विस्तृत सर्वे, ड्रिलिंग और वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे।
- सकारात्मक परिणाम मिलने पर भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन शुरू होने की संभावना बढ़ेगी।
- परियोजना से क्षेत्र के विकास, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
