बिलासपुर में भी लागू होगा कमिश्नरेट सिस्टम: अब कलेक्टर नहीं, सीधे पुलिस लेगी लाठीचार्ज और जिलाबदर का फैसला; तैनात होंगे 3 DCP

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर की कानून-व्यवस्था को लेकर साय सरकार एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली (Police Commissionerate System) के सफल परिणाम देखने के बाद अब बिलासपुर समेत प्रदेश के अन्य बड़े संभागों में भी इसे लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
यह बड़ा संकेत प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने रविवार को बिलासपुर में आयोजित सराफा एसोसिएशन के महासम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत में दिया। गृहमंत्री ने साफ कहा कि बिलासपुर पुलिस के पूरे ढांचे (फॉर्मेशन) में एक बड़ा फेरबदल किया जाएगा, जिससे अपराधियों पर नकेल कसी जा सके।
कलेक्टर या SDM के आदेश का नहीं करना होगा इंतजार
इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद बिलासपुर पुलिसिंग का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अब कलेक्टर या एसडीएम (SDM) के आदेश की राह नहीं देखनी पड़ेगी।
कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस कमिश्नर के पास सीधे ये अधिकार होंगे:
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- शहर में धारा 163 (पुरानी धारा 144) लागू करना।
- जरूरत पड़ने पर लाठीचार्ज का तुरंत फैसला लेना।
- शातिर अपराधियों को सीधे जिलाबदर (तड़ीपार) करने की पावर।
क्या होगा फायदा? इन अधिकारों के पुलिस के पास आने से इमरजेंसी की स्थिति में निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद तेज और प्रभावी हो जाएगी, जिससे दंगों या उपद्रव जैसी स्थितियों पर तुरंत काबू पाया जा सकेगा।
शहर में तैनात होंगे 3 DCP; 24 घंटे होगी थानों की मॉनिटरिंग
फिलहाल बिलासपुर जिले की कमान एसएसपी (SSP) के हाथों में होती है। लेकिन नया सिस्टम आते ही बिलासपुर शहरी क्षेत्र को 2 से 3 जोन में बांट दिया जाएगा।
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- हर जोन में एक DCP (डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस) की तैनाती होगी, जो एसपी (SP) रैंक के अधिकारी होंगे।
- उच्च अधिकारी सीधे फील्ड पर तैनात रहेंगे, जिससे अपराधियों पर 24 घंटे पैनी नजर रहेगी और थानों की क्लोज मॉनिटरिंग हो सकेगी।
- इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी पुलिसिंग को बिल्कुल अलग-अलग कर दिया जाएगा।
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बिलासपुर में क्यों पड़ी कमिश्नरी सिस्टम की जरूरत?
बिलासपुर सिर्फ एक सामान्य शहर नहीं है। यहाँ छत्तीसगढ़ का हाईकोर्ट, रेलवे जोन, बिलासपुर यूनिवर्सिटी और एक बहुत बड़ा कोचिंग हब है। इस वजह से यहाँ ‘फ्लोटिंग पॉपुलेशन’ (रोज आने-जाने वाले लोग) बहुत ज्यादा है।
हाल के दिनों में सिविल लाइन, कोनी और सरकंडा जैसे इलाकों में ऑनलाइन सट्टा, नशाखोरी और बढ़ते क्राइम ग्राफ को रोकने में पारंपरिक पुलिस व्यवस्था छोटी पड़ रही थी। नए सिस्टम से पुलिस को जांच के साथ-साथ प्रशासनिक न्याय की भी ताकत मिलेगी।
सराफा व्यापारियों की मांग पर सरकार करेगी विचार
महासम्मेलन में पहुंचे गृहमंत्री विजय शर्मा के सामने सराफा एसोसिएशन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317 (चोरी का सामान मिलने पर कार्रवाई) की पेचीदगियों को रखा। व्यापारियों ने मांग की कि इस प्रक्रिया को आसान और स्पष्ट बनाया जाए ताकि निर्दोष व्यापारी न फंसें। इस पर गृहमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार के स्तर पर इस पर जल्द ही ठोस फैसला लिया जाएगा।
बढ़ते अपराधों पर विपक्ष को घेरा
प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा, “अपराध हो रहे हैं, तो पुलिस उतनी ही तेजी से आरोपियों को सलाखों के पीछे भी भेज रही है। विपक्ष केवल राजनीति के लिए सवाल उठा रहा है, जबकि हमारी पुलिस हर मामले में तुरंत और सख्त एक्शन ले रही है।” इसके साथ ही उन्होंने जल्द ही बिलासपुर के मंगला और मोपका में नए थानों की शुरुआत करने की बात भी दोहराई।
