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खौफ: साइनाइड और सुहागे से तड़पाकर मारने वाले छत्तीसगढ़ के दरिंदे!

शांत और हरियाली के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ के इतिहास में जुर्म के कुछ ऐसे काले पन्ने भी दर्ज हैं, जिन्हें पढ़कर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है। जब भी सीरियल किलर्स का जिक्र होता है, तो जेहन में चाकू या बंदूक का खयाल आता है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में कुछ ऐसे भी ‘मौत के सौदागर’ रहे हैं, जिन्होंने हत्या के लिए किसी हथियार का नहीं, बल्कि ‘साइनाइड’ और ‘सुहागे’ जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया।

इन दरिंदों ने न सिर्फ लोगों की जान ली, बल्कि उन्हें तड़पा-तड़पा कर मौत के घाट उतारा। आइए जानते हैं जुर्म की इस खौफनाक दुनिया की पूरी कहानी।

भरोसे का कत्ल और ‘साइनाइड’ की साइलेंट मौत

सीरियल किलिंग के इन मामलों में सबसे खौफनाक बात यह थी कि कातिल कोई अनजान नहीं, बल्कि वो लोग थे जिन पर पीड़ितों ने सबसे ज्यादा भरोसा किया। इनमें से एक तरीका था ‘साइनाइड’ का इस्तेमाल।

 मीठी बातों का जाल: किलर सबसे पहले अपने शिकार से दोस्ती करता, उनका भरोसा जीतता और फिर मौका देखकर उनके खाने या पीने की चीज में साइनाइड मिला देता।

 बिना शोर-शराबे की मौत: साइनाइड शरीर में जाते ही कुछ पलों में इंसान की सांसें रोक देता है। इन हत्यारों ने इस जहर को इसलिए चुना ताकि मौत प्राकृतिक लगे और पुलिस को कोई सुराग न मिले।

 लालच, अंधविश्वास और पैसों की हवस के चलते इन दरिंदों ने कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

‘सुहागे’ का खौफ: मौत से बदतर टॉर्चर

अगर साइनाइड से मौत चंद पलों में हो जाती है, तो ‘सुहागे’ (Borax) से होने वाली मौत का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। एक सीरियल किलर ने तो क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए अपने शिकार को सुहागा पिलाकर मारा।

 तड़पने के लिए छोड़ दिया: सुहागा जब शरीर के अंदर जाता है, तो वह अंदरूनी अंगों को बुरी तरह जला देता है।

 रूह कंपा देने वाला दर्द: पीड़ित घंटों तक तड़पता रहता है, उसके मुंह से झाग और खून आने लगता है। किलर इतनी बेरहमी से अपने शिकार को आंखों के सामने तड़पकर मरते हुए देखता था। यह कोई आम मर्डर नहीं था, बल्कि एक साइकोपैथ (Psychopath) का विकृत खेल था जिसे दूसरों को दर्द देकर मजा आता था।

कैसे हुआ इस ‘मौत के खेल’ का पर्दाफाश?

जुर्म चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह अपना सुराग जरूर छोड़ता है। लगातार हो रही इन रहस्यमयी मौतों ने पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी थी।

शुरुआत में ये मौतें सामान्य लगीं, लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स में जहर और सुहागे जैसे रसायनों के अंश मिलने शुरू हुए, तो पुलिस के कान खड़े हो गए। पुलिस ने कड़ियों को जोड़ा, कॉल डिटेल्स खंगालीं और पीड़ितों के आखिरी संपर्कों की जांच की। तब जाकर इन चेहरों से नकाब उतरा जो दिन के उजाले में शरीफ दिखते थे, लेकिन अंधेरे में मौत बांटते थे।

आज भी ताजा है दहशत

गिरफ्तारी के बाद जब इन सीरियल किलर्स ने पुलिस के सामने अपने गुनाह कबूले, तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। इन्हें सजा तो मिल गई, लेकिन छत्तीसगढ़ के उन इलाकों में आज भी जब इन दरिंदों का नाम लिया जाता है, तो लोग सिहर उठते हैं।

यह खौफनाक दास्तां एक कड़वा सबक है कि कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा हमारे सबसे करीब होता है। अजनबियों पर आंख मूंदकर भरोसा करना किस तरह मौत को दावत दे सकता है, यह कहानी उसी का जीता-जागता सबूत है।

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