पंडवानी की महानायिका तीजन बाई का निधन, राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

रायपुर/गनियारी: छत्तीसगढ़ की लोक कला और ‘पंडवानी’ गायन को सात समंदर पार तक गूंजने वाली कला जगत की महानायिका, पद्म विभूषण तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। 70 वर्ष की आयु में शनिवार देर रात (3:15 बजे) रायपुर एम्स (AIIMS) में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार थीं। तीजन बाई के निधन की खबर से पूरे देश और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
पैतृक गांव गनियारी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
रविवार सुबह लगभग 11 बजे तीजन बाई के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया। जैसे ही उनका शव गांव पहुंचा, वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। अपनी चहेती कलाकार को अंतिम विदाई देने के लिए भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा। शासन की ओर से उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
नाना से मिली थी प्रेरणा, तंबूरे को बनाया गदा
तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्हें महाभारत की कथाएं सुनाने और पंडवानी की प्रेरणा अपने नाना से मिली थी। जब वे हाथ में तंबूरा लेकर खड़ी होती थीं, तो वह तंबूरा कभी भीम की गदा, कभी अर्जुन का धनुष तो कभी दुशासन की छाती चीरने वाला शस्त्र बन जाता था। अपनी सशक्त कड़क आवाज, चेहरे के अद्भुत हाव-भाव और अनोखी प्रस्तुति शैली से उन्होंने पुरुषों के वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में अपनी एक अमिट पहचान बनाई।
पद्मश्री से पद्म विभूषण तक का सफर
भारतीय लोक कला और छत्तीसगढ़ की संस्कृति में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें देश के कई सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा गया:
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- पद्मश्री (1988)
- पद्म भूषण (2003)
- पद्म विभूषण (2019) — देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान
पीएम मोदी और सीएम विष्णुदेव साय ने जताया गहरा दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा— “उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीजन बाई को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पंडवानी के जरिए उन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन किया है। उनका जाना छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक इतिहास के एक गौरवशाली अध्याय का अंत है।
पंडवानी की कड़कती बिजली जैसी वह आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई है, लेकिन तीजन बाई की कला और उनका तंबूरा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। भावभीनी श्रद्धांजलि!
