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बिरगांव: उरला सरकारी स्कूल में ‘महा-लापरवाही’; बच्चों के हाथ खाली, गोदाम में कैद हैं मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म!

रायपुर। नगर निगम बिरगांव के उरला स्थित शासकीय स्कूल से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दिन बीत चुके हैं, लेकिन आज 23 जून 2026 तक इस स्कूल के मासूम बच्चों को शासन द्वारा मिलने वाली मुफ्त पाठ्य-पुस्तकें और गणवेश (यूनिफॉर्म) नसीब नहीं हुए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार की तरफ से सप्लाई स्कूल पहुंच चुकी है, लेकिन वह बच्चों के बस्तों में सजने के बजाय स्कूल के गोदामों में धूल खा रही है।

​इस घोर लापरवाही को लेकर स्कूल के प्राचार्य अनुराग ओझा, प्रधान पाठक हरिशंकर साहू और प्राथमिक शाला की प्रधान पाठक सोनाली देशपांडे पर गंभीर आरोप लगे हैं।

DEO के आदेश की सरेआम धज्जियां, ‘स्कैनिंग’ के नाम पर खेल!

​जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रायपुर के सख्त और स्पष्ट निर्देश हैं कि जैसे ही एक-एक पाठ्य-पुस्तक स्कैन होती जाए, उसे तुरंत छात्र को सौंप दिया जाए। किताबों को एक साथ स्टॉक करके रखने की सख्त मनाही है।

DEO का स्पष्ट आदेश: “पुस्तकों को स्टॉक में न रखें। जैसे ही एक किताब स्कैन हो, तुरंत विद्यार्थी के हाथ में दें ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।”

 

​लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। सामने आए एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूल प्रबंधन सभी किताबों को एक साथ जमा करके स्कैन कर रहा है। पालकों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद बच्चों को किताबें मिलेंगी भी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

कटघरे में जिम्मेदार: ये हैं मुख्य आरोप

  1. प्राचार्य अनुराग ओझा की संदिग्ध भूमिका: स्कूल के मुखिया होने के नाते पूरे मामले की निगरानी प्राचार्य अनुराग ओझा की थी। आरोप है कि उनकी पूरी जानकारी और कथित संरक्षण में ही इन किताबों और यूनिफॉर्म को रोका गया है।
  2. दागी प्रधान पाठक हरिशंकर साहू फिर विवादों में: वितरण न करने की मुख्य जिम्मेदारी मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक हरिशंकर साहू पर है। गौरतलब है कि श्री साहू इसी तरह के मामलों में पूर्व में भी निलंबित (Suspend) हो चुके हैं। इनका पुराना रिकॉर्ड पहले से ही खराब रहा है।
  3. प्रधान पाठक सोनाली देशपांडे पर भी आरोप: प्राथमिक शाला की प्रधान पाठक श्रीमती सोनाली देशपांडे पर भी बच्चों की किताबें रोकने और वितरण में ढिलाई बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं।

शुरू से ही ‘विवादों का केंद्र’ रहा है उरला स्कूल

​यह कोई पहली बार नहीं है जब उरला शासकीय स्कूल सुर्खियों में आया हो। यह स्कूल पहले से ही विवादों का अड्डा रहा है। पूर्व में भी यहाँ गणवेश वितरण और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर कई शिकायतें हो चुकी हैं, यहाँ तक कि इसी स्कूल के एक शिक्षक पर पूर्व में एफआईआर (FIR) भी दर्ज की जा चुकी है।

पालकों में भारी आक्रोश, RTE के उल्लंघन का आरोप

​स्थानीय पालकों का कहना है कि प्राचार्य अनुराग ओझा की शह पर दोनों प्रधान पाठक (हरिशंकर साहू और सोनाली देशपांडे) अपनी मनमानी चला रहे हैं। भीषण गर्मी और सत्र की शुरुआत में जहाँ बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, वहाँ उन्हें खाली हाथ स्कूल से लौटना पड़ रहा है। सजग नागरिकों का कहना है कि यह सीधे तौर पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 और शासन के आदेशों का खुला उल्लंघन है।

​अब देखना यह होगा कि इस वीडियो और उजागर हुई लापरवाही के बाद जिला शिक्षा विभाग इन लापरवाह अधिकारियों पर क्या त्वरित और दंडात्मक कार्रवाई करता है!

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