छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, गोवा के लग्जरी होटल सहित 1000 करोड़ की संपत्ति कुर्क; भूपेश बघेल के बेटे का नाम भी आया सामने
रायपुर:
छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला (Chhattisgarh Liquor Scam) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की है। ED के रायपुर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत तीन प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करते हुए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की बाजार मूल्य (Market Value) वाली संपत्तियों को कुर्क (Attach) कर लिया है। जप्त की गई इन संपत्तियों में गोवा का एक आलीशान लग्जरी होटल, रायपुर के कई कीमती प्लॉट्स और करोड़ों रुपये के शेयर शामिल हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे और सिंडिकेट पर गंभीर आरोप
ED द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस जांच में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल का नाम भी सीधे तौर पर जोड़ा गया है। केंद्रीय एजेंसी का दावा है कि सिंडिकेट द्वारा छत्तीसगढ़ के आबकारी तंत्र में हेरफेर कर जुटाए गए काले धन का एक बड़ा हिस्सा गोवा ट्रांसफर किया गया था।
ED का बड़ा दावा है कि गोवा के अंजुना में स्थित ‘होटल वेस्टिन’ (Hotel Westinn Goa) को खरीदने के लिए शराब घोटाले से कमाए गए 110 करोड़ रुपये कैश में दिए गए थे। इस बेहिसाब कैश को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के कहने पर फिजिकल रूप से ट्रांसपोर्ट कर गोवा पहुंचाया गया था।
इन बड़ी संपत्तियों पर ED ने कसा शिकंजा
प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई के तहत कुल तीन अटैचमेंट आर्डर जारी किए गए हैं, जिसमें सरकारी कागजों के हिसाब से करीब 200 करोड़, जबकि वर्तमान मार्केट वैल्यू के लिहाज से 1,000 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी शामिल है:
होटल वेस्टिन, गोवा: उत्तरी गोवा के अंजुना में स्थित यह प्रीमियम होटल मैसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है, जिसके डायरेक्टर राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल हैं। इसे पूरी तरह से घोटाले के पैसे से खरीदा गया था।
रायपुर में बेनामी संपत्तियां: घोटाले के मुख्य आरोपी अनवर ढेबर के ‘बेनामी’ भूखंड, जिसमें ‘ढेबर सिटी होम्स’ के कई प्लॉट्स और शेल कंपनियों (Shining Star Buildcon, Moonlight Real Estate आदि) के नाम पर रजिस्टर्ड 5 जमीनें शामिल हैं। इसकी कीमत करीब 30 करोड़ रुपये आंकी गई है।
बैंक अकाउंट और म्यूचुअल फंड: सिंडिकेट के इशारे पर काम करने वाली तीन कंपनियों (Om Sai Beverages, Dishita Ventures, और Nexgen Power) के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड कुर्क किए गए हैं, जिनकी कुल वैल्यू ₹51 करोड़ है। इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया था।
2,883 करोड़ रुपये का है पूरा घोटाला
छत्तीसगढ़ पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की FIR के आधार पर ED इस मामले की जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि साल 2019 से 2023 के बीच अनवर ढेबर, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के सिंडिकेट ने राज्य के आबकारी विभाग को पूरी तरह हाइजैक कर लिया था।
इस सिंडिकेट ने तीन अलग-अलग तरीकों से 2,883 करोड़ रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार किया:
1 डिस्टिलरी मालिकों से शराब की खरीद पर अवैध कमीशन वसूलना।
2 सरकारी दुकानों में बिना रिकॉर्ड वाली (कच्ची/अवैध) शराब सीधे बेचना, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
3 पसंदीदा कंपनियों को लाइसेंस देकर उनसे मोटा मुनाफा वसूलना।
छठी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल, आरोपियों की संख्या हुई 85
ED ने इस बड़ी जब्ती के साथ ही रायपुर की विशेष PMLA अदालत में अपनी छठी सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। इस नई चार्जशीट में एजेंसी ने 4 नए आरोपियों के नामों को शामिल किया है, जिनमें व्यवसायी विजय भाटिया, टी. भुवनेश्वर राव, प्रबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर शामिल हैं।
प्रबीर शर्मा पर सिंडिकेट के लिए करोड़ों रुपये का कैश ट्रांसपोर्ट करने का आरोप है। इन नए नामों के जुड़ने के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल शराब घोटाले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर अब 85 हो गई है। इस कार्रवाई के बाद से छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भारी तनाव पैदा हो गया है और सत्तापक्ष एवं विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज होने के आसार हैं।
