Major Cyber Fraud: शेयर मार्केट में मुनाफे का लालच देकर शहर के बड़े कारोबारी से ₹84 लाख की ठगी, WhatsApp ग्रुप से जुड़ा था जाल
रायपुर:
राजधानी में ऑनलाइन ठगों का हौसला इस कदर बढ़ गया है कि अब शहर के रसूखदार और बड़े कारोबारी भी इनके जाल में फंस रहे हैं। ऐसा ही एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नामी बिजनेसमैन को शेयर बाजार (Share Market) में बंपर मुनाफे का झांसा देकर साइबर अपराधियों ने ₹84 लाख की चपत लगा दी।
इस पूरी ठगी को बड़े ही शातिर तरीके से सिर्फ WhatsApp और एक फर्जी मोबाइल ऐप के जरिए अंजाम दिया गया। पीड़ित कारोबारी की शिकायत पर साइबर क्राइम सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे बुना गया ठगी का जाल? (The WhatsApp Trap)
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ हफ्ते पहले पीड़ित कारोबारी को बिना उनकी मर्जी के एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया था, जिसका नाम “Institutional Equity Trading” था। इस ग्रुप में खुद को बड़े मार्केट एक्सपर्ट बताने वाले लोग शामिल थे, जो रोज शेयर बाजार से जुड़े बड़े मुनाफे के स्क्रीनशॉट और फर्जी टिप्स शेयर करते थे।
भरोसा जीता: ग्रुप के बाकी सदस्य (जो कि असल में ठगों के ही फेक अकाउंट्स थे) लगातार मैसेज कर रहे थे कि उन्होंने इस ग्रुप की मदद से लाखों रुपये कमा लिए हैं। इसे देखकर कारोबारी का भरोसा जीत लिया गया।
फर्जी ऐप डाउनलोड कराया: जालसाजों ने कारोबारी को एक लिंक भेजा और एक कथित ऑफिशियल ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने को कहा। यह ऐप बिल्कुल असली शेयर मार्केट ऐप की तरह दिखता था, जिसमें फर्जी ग्राफ और बढ़ता हुआ प्रॉफिट दिखाई देता था।
किस्तों में ऐंठे ₹84 लाख: ऐप पर दिख रहे फर्जी मुनाफे को सच मानकर कारोबारी ने जालसाजों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में दो हफ्तों के भीतर कुल ₹84 लाख ट्रांसफर कर दिए।
जब पैसे निकालने की बारी आई, तो खुला राज
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब कारोबारी के उस फर्जी ऐप वॉलेट में उनका कुल बैलेंस ₹2.5 करोड़ से ज्यादा दिखने लगा। कारोबारी ने जब इस रकम का एक हिस्सा अपने बैंक खाते में विड्रॉ (Withdraw) करने की कोशिश की, तो ट्रांजैक्शन ब्लॉक हो गया।
जब उन्होंने ग्रुप के एडमिन से संपर्क किया, तो ठगों ने कहा कि “प्रॉफिट का पैसा रिलीज करने के लिए पहले ₹20 लाख का क्लीयरेंस टैक्स और हैंडलिंग फीस जमा करनी होगी।” इसके बाद जब कारोबारी ने और पैसे देने से मना किया, तो उन्हें ग्रुप से रिमूव कर दिया गया और ऐप भी बंद हो गया। तब जाकर पीड़ित को एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।
“ग्रुप में 100 से ज्यादा लोग दिन-रात मुनाफे की बातें करते थे। मुझे लगा सब असली बिजनेसमैन हैं, लेकिन वो सब ठगों के बॉट्स और फेक प्रोफाइल्स थे जिन्होंने मिलकर मुझे फंसाया।”
— पीड़ित कारोबारी का पुलिस को दिया गया बयान
साइबर पुलिस की जांच शुरू, ‘म्यूल अकाउंट्स’ का शक
कारोबारी की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने आईटी एक्ट (IT Act) और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि ठगी की गई रकम को देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित “म्यूल अकाउंट्स” (फर्जी या किराए के बैंक खातों) में ट्रांसफर किया गया है और वहां से तुरंत क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया गया। पुलिस तकनीकी एनालिसिस के जरिए WhatsApp नंबर्स और आईपी एड्रेस को ट्रैक कर रही है।
Cyber Advisory: ऐसे फ्रॉड से खुद को कैसे बचाएं?
साइबर एक्सपर्ट्स और पुलिस ने इस घटना के बाद आम नागरिकों और निवेशकों के लिए जरूरी एडवाइजरी जारी की है:
1 WhatsApp/Telegram पर कोई ट्रेडिंग नहीं होती: सेबी (SEBI) से रजिस्टर्ड कोई भी ब्रोकर या वित्तीय संस्थान कभी भी रैंडम WhatsApp या टेलीग्राम ग्रुप बनाकर वीआईपी ट्रेडिंग टिप्स नहीं देता।
2 अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें: किसी के कहने पर या चैट पर आए एपीके (APK) लिंक से कोई भी फाइनेंशियल ऐप इंस्टॉल न करें। हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर का ही इस्तेमाल करें।
3 SEBI रजिस्ट्रेशन जरूर चेक करें: निवेश करने से पहले उस कंपनी या एडवाइजर का रजिस्ट्रेशन नंबर SEBI (Securities and Exchange Board of India) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जरूर क्रॉस-चेक करें।
4 तुरंत करें 1930 पर कॉल: अगर आप किसी भी तरह के साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं, तो बिना देर किए 1930 नंबर डायल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। ‘गोल्डन आवर’ (शुरुआती 1 घंटे) में शिकायत होने पर पैसे होल्ड होने के चांस ज्यादा होते हैं।
