Fri. Jun 19th, 2026

CGPSC भर्ती घोटाला: अब ED की धमाकेदार एंट्री; पूर्व IAS और बड़े अफसरों के 10 ठिकानों पर रेड, NGO और मनी लॉन्ड्रिंग के खेल से उठा पर्दा!

  1. रायपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले (CGPSC Recruitment Scam) में केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सीबीआई (CBI) की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी धमाकेदार एंट्री हो गई है। मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी वित्तीय लेन-देन के पुख्ता इनपुट्स के बाद ED की विशेष टीमों ने छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग-भिलाई और राजनांदगांव समेत करीब 10 से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ बड़ी दबिश दी है।

इस छापेमारी की जद में कई रिटायर्ड और वर्तमान हाई-प्रोफाइल नौकरशाह (IAS अफसर) और पूर्व CGPSC पदाधिकारी आए हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की तैनाती कर तड़के सुबह से ही दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को खंगाला जा रहा है।

ED की रडार पर कौन-कौन से बड़े नाम? (H2)

ED के सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी मुख्य रूप से वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित की गई राज्य सेवा परीक्षाओं में हुई भारी गड़बड़ियों, भाई-भतीजावाद और पैसों के अवैध लेन-देन को लेकर की जा रही है। रडार पर आए प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

 जे. के. ध्रुव (रिटायर्ड IAS व पूर्व सचिव, CGPSC): भिलाई के सेक्टर-10 स्थित इनके निवास पर सुबह-सुबह ही ED की टीम ने दस्तक दी। इनके कार्यकाल के दौरान भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं।  

 अमृत खलको (IAS अधिकारी): भिलाई के तालपुरी स्थित इनके आवास पर भी केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त टीम दस्तावेजों को खंगाल रही है। आरोप है कि इनके बच्चों का चयन भी विवादित सूची में ऊंचे पदों (डिप्टी कलेक्टर) पर हुआ था।  

 आरती वासनिक (पूर्व परीक्षा नियंत्रक): रायपुर स्थित इनके आवास पर भी जांच जारी है, जहाँ परीक्षा की गोपनीयता भंग करने से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल हो रही है।  

 ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक): राजनांदगांव स्थित इनके ठिकानों पर भी सीआरपीएफ के पहरे के बीच छानबीन की जा रही है।

याद दिला दें: इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड और पूर्व CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वे फिलहाल जेल (न्यायिक हिरासत) में हैं।

NGO फंड ट्रांसफर और ‘proceeds of crime’ का पूरा खेल

CBI और ED की अब तक की जांच में जो सबसे चौंकाने वाला मोड़ आया है, वह है Corporate Social Responsibility (CSR) फंड और NGO के जरिए पैसों की हेराफेरी।

या है पूरा गणित? 

जांच एजेंसियों के अनुसार, एक निजी पावर कंपनी (बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड) द्वारा करीब 45 लाख रुपये का फंड सीएसआर के नाम पर एक ऐसे एनजीओ (NGO) को ट्रांसफर किया गया था, जिसकी कमान पूर्व सीजीपीएससी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी की पत्नी के हाथों में थी।  

जांच एजेंसियों को शक है कि यह सीधा-सीधा रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है, जिसे परीक्षा के नंबरों को मैनेज करने और क्वेश्चन पेपर लीक करने के बदले ‘डोनेशन’ की शक्ल में ठिकाने लगाया गया था। ED इसी ‘Proceeds of Crime’ (अपराध की कमाई) के वित्तीय ट्रेल को खंगाल रही है।  

डिजिटल डेटा और हार्ड ड्राइव की हो रही है फॉरेंसिक जांच

ED की इस रेड में सिर्फ कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जब्त किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और लॉकरों को सील कर दिया गया है।

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से इन डिवाइसेज से डिलीट किए गए डेटा, व्हाट्सएप चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स को रिकवर किया जा रहा है ताकि यह साबित किया जा सके कि परीक्षा के दौरान किन-किन रसूखदारों के बीच बातचीत हुई थी और पैसों का ट्रांसफर किस रूट से हुआ था।

छात्रों की उम्मीदें और आगे की राह 

छत्तीसगढ़ के लाखों युवा जो सालों तक कमरों में बंद होकर पीएससी की तैयारी करते हैं, उनके लिए यह घोटाला एक गहरा मानसिक आघात था। इस घोटाले के उजागर होने के बाद कई विवादित अधिकारियों (जैसे कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू) को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है।

अब ED की इस एंट्री से उन सफेदपोशों की रात की नींद उड़ गई है, जिन्होंने पैसों के दम पर काबिल छात्रों के हक को मारा था। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों से इंकार नहीं किया जा सकता।

 

About The Author