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सुशासन तिहार के मंच पर भाजपा नेताओं का फूटा गुस्सा, खाली कुर्सियों से लेकर ‘घूसखोर पटवारी’ तक गरमाई सियासत

सुशासन तिहार के मंच पर भाजपा नेताओं का फूटा गुस्सा, खाली कुर्सियों से लेकर ‘घूसखोर पटवारी’ तक गरमाई सियासत

गरियाबंद – आशुतोष सिंह ,ऐश्वर्य उपाध्याय (रायपुर)

गरियाबंद जिले में आयोजित सुशासन तिहार अब सुशासन से ज्यादा सिस्टम पर उठ रहे सवालों को लेकर चर्चा में आ गया है। एक तरफ अमलीपदर के समाधान शिविर में खाली कुर्सियों ने प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी, तो दूसरी ओर राजिम विधायक के “घूस लेने वाले पटवारी को चप्पल से मारूंगा” वाले बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। दोनों घटनाओं ने जिले की प्रशासनिक कार्यशैली और सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खाली कुर्सियां देख मंच से भड़के भाजपा नेता

अमलीपदर तहसील मुख्यालय में आयोजित समाधान शिविर के दौरान माहौल उस समय गर्म हो गया, जब मंच पर मौजूद पूर्व भाजपा संसदीय सचिव एवं वरिष्ठ नेता गोवर्धन मांझी ने प्रशासनिक अधिकारियों पर खुलकर नाराजगी जाहिर की।

कार्यक्रम में कलेक्टर भगवान सिंह उईके भी मौजूद थे। माइक संभालते ही मांझी ने प्रशासन को घेरते हुए कहा—

“कलेक्टर साहब, कम से कम फोन तो उठा लिया कीजिए… छोटी-छोटी समस्याएं ऐसे ही हल हो जाती हैं। जनता पानी-बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर हमारे पास आती है, लेकिन अधिकारी फोन तक नहीं उठाते।”

उन्होंने कहा कि कई लोग आवेदन देकर थक चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। ऐसे में केवल समाधान शिविर लगाने से जनता को राहत नहीं मिलने वाली।

मांझी ने खाली पड़ी कुर्सियों की ओर इशारा करते हुए तंज कसा—

“शिविर कोई जादू की छड़ी नहीं है कि एक दिन में सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। सरकार की मंशा अच्छी है, लेकिन यहां की तस्वीर बता रही है कि प्रशासन ने प्रचार-प्रसार और तैयारी को गंभीरता से नहीं लिया।”

उनके बयान के बाद मंच पर कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया और अधिकारी भी असहज नजर आए।

“घूसखोर पटवारी को चप्पल से मारूंगा”

विधायक के बयान पर पटवारी संघ लामबंद

उधर छुरा ब्लॉक के ग्राम पाटसिवनी में 5 मई को आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया।

जनसभा के दौरान एक मौखिक शिकायत पर विधायक ने मंच से ही कथित रिश्वतखोरी के मामले में संबंधित पटवारी को हटाने की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच में 40 हजार रुपये घूस लेने की बात सही पाई गई तो एफआईआर दर्ज कराई जाए। इसी दौरान गुस्से में उन्होंने कहा—

“घूस लेने वाले पटवारी को चप्पल से पिटाई करूंगा।”

विधायक के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बयान के विरोध में तहसील शाखा छुरा के पटवारी संघ ने लिखित ज्ञापन सौंपते हुए सुशासन तिहार 2026 के बहिष्कार की चेतावनी दी है। संघ ने विधायक की टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए नाराजगी जाहिर की।

सुशासन तिहार या सिस्टम की नाकामी?

जिले में सामने आई दोनों घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोर मॉनिटरिंग और सिस्टम में कसावट की कमी को उजागर कर रही हैं। एक तरफ जनप्रतिनिधि अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार के आरोप और विवादित बयान सरकारी छवि पर असर डाल रहे हैं।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल समाधान शिविर लगाकर जनता की समस्याएं दूर हो जाएंगी, या फिर व्यवस्था में जमी लापरवाही और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। सुशासन तिहार के बीच उठे ये सवाल फिलहाल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते नजर आ रहे हैं।

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