🚨 छत्तीसगढ़ में बड़ा फैसला: अब हाथी की मौत को माना जाएगा ‘क्राइम सीन’, वन विभाग कराएगा वैज्ञानिक जांच

रायपुर/रायगढ़: छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण को और अधिक मजबूत और कड़ा बनाने के लिए वन विभाग ने एक बेहद ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब प्रदेश के जंगलों में यदि किसी भी हाथी की मौत होती है, तो उसे महज एक सामान्य घटना नहीं माना जाएगा। वन विभाग अब ऐसी हर घटना को एक ‘संभावित अपराध स्थल’ (Potential Crime Scene) के रूप में देखेगा और उसकी बारीकी से जांच की जाएगी।
रायगढ़ में 78 अधिकारियों को मिली स्पेशल ट्रेनिंग
इसी कड़ी में रायगढ़ में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित इस ट्रेनिंग में प्रदेशभर के 78 वन अधिकारी और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच और वन्यजीव अपराधों की पहचान करने पर मुख्य फोकस रहा।
छत्तीसगढ़ में फिलहाल करीब 450 हाथी विचरण कर रहे हैं। रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जिलों में मानव-हाथी संघर्ष और हाथियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।
क्राइम सीन की तरह जुटाए जाएंगे वैज्ञानिक साक्ष्य
ट्रेनिंग के दौरान अधिकारियों और डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मृत हाथी मिलने पर सबसे पहले घटना स्थल को सुरक्षित किया जाए। इसके बाद विषप्रयोग (Poisoning), शिकार (Poaching) या करंट जैसी संदिग्ध गतिविधियों के सबूत जुटाए जाएं।
अधिकारियों को फील्ड में ले जाकर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई, जिसमें:
- शव परीक्षण (Post-Mortem) की वैज्ञानिक प्रक्रिया।
- रक्त, ऊतक (Tissues) और जैविक नमूनों का सही संग्रहण।
- दुर्गम इलाकों में सुरक्षित जांच और लैब परीक्षण के तरीके।
राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों ने दिए सीक्रेट टिप्स
इस ट्रेनिंग को हाई-टेक बनाने के लिए ‘भारतीय वन्यजीव संस्थान’, ‘भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान’ और ‘वन्यजीव फोरेंसिक अध्ययन संस्थान’ के देश के बड़े विशेषज्ञों को बुलाया गया था।
मामले में वन मंत्री केदार कश्यप ने साफ किया है कि राज्य सरकार वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी। आधुनिक तकनीक और फॉरेंसिक जांच के जरिए अब मूक वन्यजीवों के शिकारियों पर शिकंजा और कड़ा किया जाएगा।
