रायपुर: यूजर चार्ज और संपत्ति कर पर ‘सियासी कचरा’, कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान; महापौर बोलीं- फैसला आपके समय का था

रायपुर। रायपुर नगर निगम द्वारा संपत्ति कर के साथ यूजर चार्ज बढ़ाने का मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक विवाद बन चुका है। कांग्रेस के आक्रामक रुख के बाद अब शहर के आम नागरिक और व्यापारी भी इस फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं। जनता का साफ कहना है कि जब शहर की सफाई व्यवस्था ही दुरुस्त नहीं है, तो अतिरिक्त जेब क्यों ढीली की जाए?
2022 की वो तस्वीर: जब रोल उलट थे!
दिलचस्प बात यह है कि साल 2022 में जब नगर निगम में कांग्रेस की परिषद थी, तब भाजपा ने यूजर चार्ज बढ़ाने का पुरजोर विरोध किया था। आज की महापौर मीनल चौबे उस समय नेता प्रतिपक्ष थीं।
15 मार्च 2022 का वाकया: सामान्य सभा में संपत्ति कर और यूजर चार्ज पर चर्चा की मांग को लेकर भाजपा पार्षदों ने भारी हंगामा किया था। तत्कालीन सभापति प्रमोद दुबे ने जब चर्चा टालने की कोशिश की, तो भाजपा पार्षद डायस तक पहुंच गए, जिसके बाद भाजपा के 8 पार्षदों को निलंबित कर दिया गया था। उस दिन तत्कालीन राज्यपाल अनुसुइया उइके के संबोधन के दौरान भी जमकर बवाल हुआ था।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी का हमला: ‘सफाई नहीं, फिर क्यों बढ़ा चार्ज?’
मौजूदा नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इन नीतियों की सबसे ज्यादा मार आम जनता पर पड़ रही है।
- शहर के कई इलाकों में आज भी कचरे के ढेर लगे हैं।
- डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था पूरी तरह ठप है।
- जब तक नियमित सफाई सुनिश्चित न हो, तब तक अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना जनता के साथ अन्याय है।
कांग्रेस ने इस फैसले के विरोध में तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) के पास बड़ा हस्ताक्षर अभियान चलाया और चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस नहीं हुआ, तो आंदोलन उग्र होगा।
महापौर मीनल चौबे का पलटवार: ‘कांग्रेस के कार्यकाल का ही है यह अनुबंध’
दूसरी तरफ, महापौर मीनल चौबे ने पूरे मामले का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ते हुए कहा कि यूजर चार्ज बढ़ाने का निर्णय नया नहीं है।
- 2022 का फैसला: तत्कालीन कांग्रेस परिषद ने ही नियमों और राजपत्र का हवाला देकर इसे मंजूरी दी थी।
- कंपनी से अनुबंध: कचरा उठाने वाली कंपनी के साथ जो अनुबंध हुआ है, वह कांग्रेस शासनकाल में ही स्वीकृत हुआ था, जिसमें यूजर चार्ज से भुगतान की शर्त तय थी।
- सफाई में सुधार का दावा: महापौर ने माना कि फिलहाल 100% डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है, लेकिन कंपनी की नियमित मॉनिटरिंग कर व्यवस्था सुधारी जाएगी। 2025 में होने वाले संशोधन को रोककर अब मामूली बढ़ोतरी की गई है।
जनता और व्यापारी वर्ग में भारी आक्रोश
बढ़ती महंगाई के बीच इस फैसले से आम लोग और व्यापारी बेहद नाराज हैं:
- व्यापारी अशोक पटेल ने कहा, “निगम के सफाई कर्मचारी खुद हड़ताल पर हैं, कई जगह समय पर कचरा नहीं उठता। ऐसे में किस बात का यूजर चार्ज बढ़ाया जा रहा है?”
- स्थानीय निवासी प्रतीक तिवारी और हीरालाल का कहना है कि पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजें पहले ही महंगी हैं। आमदनी बढ़ नहीं रही और निगम बिना सुविधाएं दिए टैक्स पर टैक्स लाद रहा है।
समझिए, क्या होता है यूजर चार्ज?
यूजर चार्ज वह शुल्क है जो नगर निगम नागरिकों को दी जाने वाली कुछ खास सेवाओं (जैसे घर-घर से कचरा उठाना, उसका परिवहन और डिस्पोजल) के बदले वसूलता है। निगम का तर्क है कि व्यवस्था को चलाने के लिए यह जरूरी है, जबकि जनता का तर्क है कि बिना सेवा, कैसा टैक्स?
